Thursday, April 23, 2026
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कुमारी शैलजा करेगी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन संवाद

उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा 8 मई को उत्तराखंड का दौरा
गढ़वाल मंडल के 4 जिलों का दौरा करेंगी

देहरादून: कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा फिर उत्तराखंड आ रही हैं। बीती 8 अप्रैल को वो अपने पांच दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंचीं थी। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी और सांसद कुमारी शैलजा एक बार फिर 4 मई को उत्तराखंड आ रही हैं। इस बार वो गढ़वाल मंडल के चार जिलों का धुआंधार दौरा करने जा रही हैं।
इससे पहले कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने 8 अप्रैल से उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर से अपने चार दिवसीय दौरे की शुरुआत की थी। तब उन्होंने रुद्रपुर, काशीपुर महानगर कांग्रेस और जिला कमेटियों के पदाधिकारियों की बैठक ली थी। 9 अप्रैल को उन्होंने नैनीताल जिले के हल्द्वानी में सभी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की बैठक करने के बाद कोटद्वार में बैठक की थी। इसके अलावा उन्होंने हरिद्वार में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में भाग लिया था।
इसके बाद वह 11 अप्रैल को मसूरी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं थी। 11 अप्रैल की शाम को उन्होंने महानगर कांग्रेस कमेटी, जिला कांग्रेस कमेटी परवादून और पछुवादून के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक मजबूती व अग्रिम चुनावी रणनीति को लेकर संवाद स्थापित किया था। इसके बाद वो वापस दिल्ली लौट गईं थी।
अब एक बार फिर कुमारी शैलजा उत्तराखंड आ रही हैं। अब वो गढ़वाल मंडल के चार जिलों का आगामी 4 मई से भ्रमण करने जा रही हैं। उनके इस प्रस्तावित दौरे पर कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी का दौरा इसी तरह आगे भी चलता रहेगा। उनका उत्तराखंड का दौरा पहले 28 अप्रैल से प्रस्तावित था। किसी कारणवश कुमारी शैलजा अब 4 मई को गढ़वाल मंडल के चार जिलों का भ्रमण करने जा रही हैं।
गढ़वाल मंडल के दौरे पर वह 10 या 11 मई तक कई जिलों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करेंगी। इस दौरान कुमारी शैलजा चुनावी रणनीति को लेकर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करेंगी। इस बीच ग्रुपों में भी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके साथ वन टू वन बातचीत करनी होगी। कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया है कि नेता और कार्यकर्ता उनके साथ अलग से वार्ता भी कर सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि यह चुनावी वक्त है और ऐसे समय में यदि पार्टी प्रभारी दोबारा उत्तराखंड दौरे पर आती हैं तो इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार होता है। पार्टी का मानना है कि इस बार दोगुनी क्षमता के साथ कांग्रेस पार्टी चुनावी रणभूमि में उतरने को पूरी तरह से तैयार है।

 

बसन्त विहार क्षेत्र में हुई चोरी की घटना का दून पुलिस ने किया खुलासा

घटना को अंजाम देने वाले अभियुक्त को किया गिरफ्तार,

घटना में प्रयुक्त रिक्शा संख्या: यू0के0-07-टीडी-9132 को किया सीज

थाना बसंत विहार में सुमित निवासी अंबीवाला द्वारा लिखित प्रार्थना पत्र दिया कि वह नेशनल हाईवे बनाने का कार्य कर रहे हैं तथा उनकी उमेदपुर/लक्ष्मीपुर स्थित साइट से अज्ञात चोरों द्वारा लाखों रू0 मूल्य के जनरेटर बैटरी, लेजर पाइप, सरिया, स्टील आदि चोरी कर लिया है।
तहरीर के आधार पर थाना बसन्त विहार पर अभियोग पंजीकृत किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा सभी अधीनस्थों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सघन चैकिंग/सत्यापन अभियान चलाते हुए आपराधिक गतिविधियों में लिप्त अभियुक्तों को चिन्हित करते हुए उनके विरूद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है।
घटना के अनावरण तथा अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा थाना बसंत विहार पर गठित पुलिस टीम द्वारा घटना स्थल तथा उसके आस-पास आने जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों का अवलोकन कर संदिग्धों के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारियां एकत्रित की गई। जिसमें घटना स्थल से एक ई-रिक्शा संख्या: यू0के0-07-टीडी-9132 जाता हुआ दिखाई दिया। प्राप्त जानकारी के आधार पर सुरागरसी पतारसी करते हुए मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। साथ ही पूर्व में इस प्रकार की घटना को अंजाम देने वाले अभियुक्तों की वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन किया गया। पुलिस टीम द्वारा चलाये जा रहे सघन चैकिंग अभियान के दौरान दिनांक: 21-04-26 को मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दिया ई-रिक्शा वर्तमान में पलवल रोड की ओर जा रहा है। जिस पर पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए उक्त रिक्शा को रोककर चैक किया गया तो ई-रिक्शा को शान मोहम्मद पुत्र वकील अहमद नाम का व्यक्ति चला रहा था। ई-रिक्शा को चेक करने पर ई-रिक्शा के अंदर से 64 लेजर पाइप लोहे के, 06 एंगल बड़े व 08 एंगल छोटे बरामद हुए। जिनके सम्बन्ध में सख्ती से पूछताछ करने पर अभियुक्त द्वारा उक्त माल नेशलन हाइवे की साइट से चोरी किया जाना स्वीकार किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी, चारधाम यात्रा बनी सुरक्षित व सुगम

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अब विधिवत रूप से शुरू हो चुकी है। गंगोत्री मंदिर और यमुनोत्री मंदिर के कपाट खुलने के बाद केदारनाथ मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में आस्था, उत्साह और श्रद्धा का विशाल प्रवाह देखने को मिल रहा है।
पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के मार्गदर्शन और स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यात्रा को सुरक्षित,व्यवस्थित और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। इस बार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को “प्रो-एक्टिव” रणनीति के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही यात्रा मार्गों पर तैनात की जा चुकी हैं। इन टीमों द्वारा स्वास्थ्य जांच, प्राथमिक उपचार, आपातकालीन सेवाएं और जागरूकता अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, क्विक रिस्पांस टीमें और अस्थायी स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का फोकस केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को पहले से जागरूक कर स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना भी है।

दूसरे राज्यों में भी पहुंची स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम

इसी रणनीति के तहत उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उन राज्यों में भेजा गया है, जहां से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए आते हैं। इस क्रम में सहायक निदेशक, स्वास्थ्य विभाग डॉ. अमित शुक्ला ने मध्य प्रदेश का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अशोक बर्नवाल, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), मध्य प्रदेश शासन से मुलाकात कर चारधाम यात्रा से संबंधित स्वास्थ्य तैयारियों और जागरूकता पर चर्चा की। उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार हिंदी एवं अंग्रेज़ी में स्वास्थ्य एडवाइजरी भी साझा की गई, ताकि इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सके और श्रद्धालु यात्रा से पहले ही आवश्यक सावधानियां अपना सकें।

जागरूक श्रद्धालु, सुरक्षित यात्रा

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में श्रद्धालुओं को यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण कराने, आवश्यक दवाइयां साथ रखने, पर्याप्त विश्राम करने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धीरे-धीरे अनुकूलन अपनाने की सलाह दी गई है।बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए विशेष सावधानियां भी सुझाई गई हैं, जिससे किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम को कम किया जा सके। चारधाम यात्रा के विधिवत शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार व्यवस्थाएं पारंपरिक स्वरूप से आगे बढ़कर अधिक संगठित, तकनीकी रूप से सक्षम और स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से सुदृढ़ हैं। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और अंतरराज्यीय समन्वय यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालु सुरक्षित, स्वस्थ और सहज तरीके से अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण कर सकें।

सुरक्षित और सुगम यात्रा सरकार की प्राथमिकता

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि चारधाम यात्रा प्रदेश की आस्था और पहचान का केंद्र है, इसलिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को हर स्तर पर मजबूत रखा जाए और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य के प्रति किया जा रहा जागरूक

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। यात्रा मार्गों पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और क्विक रिस्पांस टीमें सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में अपनी यात्रा पूरी करे और किसी भी आपात स्थिति में उसे त्वरित उपचार उपलब्ध हो सके।

मंत्री खजान दास ने नई पेयजल लाइन बिछाने का किया शुभारंभ

मंन्त्री खजान दास ने कावली रोड सहित विभिन्न वार्डवासियों को बड़ा तोहफा देते हुये कावली रोड कोमेट कालोनी, कबीर डेरी वाली गली, गोपीनाथ मंदिर वाली गली, अंसारी मार्ग, डाडीपुर मौहल्ला, कालिका मंदिर के सामने वाली गली सहित विधानसभा क्षेत्रांतर्गत विभिन्न क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों के स्थान पर नई पेयजल लाइनें बिछाने के कार्यों का भूमि पूजन कर क्षेत्रवासियों को रु० 5.80 करोड से अधिक कार्यो की सौगात दी जिससे क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। गौरतलब है क्षेत्रवासियों द्वारा पिछले काफी समय से उपरोक्त क्षेत्रों पेयजल सुधारीकरण की माॅग की जा रही थी जिसका जनहित में तत्काल संज्ञान लेते हुये विधायक ने अधिकारियों को क्षेत्र की क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओ के पुर्ननिर्माण हेतु प्रस्ताव प्रेषित करने के निर्देश दिये, जिस पर विधायक द्वारा जनहित में शासन से तुरन्त रुपये 5.80 करोड की स्वीकृति दिलाते हुये आज निर्माण कार्यो का भुमि पुजन करते हुये जनमानस की समस्याओं का समाधान किया।

इस अवसर पर खजान दास ने मुख्यमंन्त्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुये अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों मे कहा कि निर्माण कार्य हर हाल में समय अवधि में पूरे किये जाय तथा गुणवत्ता में किसी प्रकार की कोई कमी न हो, गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी पाये जाने पर संबधित अधिकारियों को बख्शा नही जायेगा।

विधायक नें करोड़ों की योजनाओ के भुमिपूजन पर अधिशासी अभियन्ता के न पहुंचने पर कडी नाराजगी व्यक्त की श्री दास ने अधिशासी अभियन्ता आशीष भट्ट को सख्त निर्देश जारी करते हुये कहा कि इस प्रकार की हीला हवाली भविष्य में कतई बर्दाश्त नही की जायेगी।

विधायक खजानदास ने कहा कि भाजपा सरकार की जनसमस्याओ के निस्तारण हेतु स्पष्ट निति है तथा प्रदेश के युवा यशस्वी मुख्यमंन्त्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के विकास हेतु एक विजन के रूप में काम कर रहे है और सदैव विकास कार्यो पर पैनी नजर रखते है। उन्होने यह भी कहा कि अधिकारी यह गलतफहमी न पाले की उनके ऊपर कोई नजर नही रखता है, मुख्यमंत्री जी स्वंय समय-समय पर क्षेत्र की हर एक निर्माणाधीन योजनाओं उनकी गुणवत्ता एंव क्षेत्र में अन्य समस्याओं की जानकारी लेते रहते हैं।

मुख्यमंत्री की त्वरित कार्यशैली का ही असर है कि आज हर एक विकास कार्य समय अवधि में पूर्ण हो रहे हैं जिससे एक ओर सरकारी धन की बचत होती है वही दूसरी और जनमानस तो समय पर तमाम विकास योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री धामी की स्पष्ट एंव पारदर्शी नीति का ही फल है कि आज तमाम विकास कार्यो को समय से स्वीकृतियां प्राप्त हो रही है, तथा निर्माण कार्य में होने वाले अनावश्यक विलम्ब के कारण निर्माण कार्य की लागत मे होने वाली वृद्धि पर भी अंकुश लगा है।

विशेष सत्र आहूत करना केवल राजनीतिक निंदा प्रस्ताव पारित करना या विपक्ष को कोसना नहीं होना चाहिए

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 30 अप्रैल से विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की खबरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि उत्तराखंड सरकार भी विशेष सत्र आहूत करने जा रही है, तो उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक निंदा प्रस्ताव पारित करना या विपक्ष को कोसना नहीं होना चाहिए।
गोदियाल ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा सत्र जनता के सरोकारों और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के लिए बुलाए जाते हैं, न कि राजनीतिक प्रतिशोध या आरोप-प्रत्यारोप के लिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया कि यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो उसमें महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विषय — महिला आरक्षण — को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण कानून देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी का संवैधानिक अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को चाहिए कि वह इस कानून को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए ठोस प्रस्ताव विधानसभा में पारित करे।
गोदियाल ने आगे कहा कि भाजपा सरकारें महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात तो करती हैं, लेकिन जब ठोस कदम उठाने का समय आता है तो वह राजनीतिक मुद्दों में उलझ जाती हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां महिलाएं सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं, वहां महिला आरक्षण को टालना या उस पर मौन रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि प्रस्तावित विशेष सत्र को जनहित और महिला सशक्तिकरण के एजेंडे पर केंद्रित किया जाए और महिला आरक्षण कानून को शीघ्र लागू करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाए।

उत्तराखंड में जून में जारी हो सकती है पंचायत चुनावों की अधिसूचना

देहरादून: उत्तराखंड में पंचायत के खाली पड़े पदों पर जल्द उपचुनाव हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इससे जुड़ा प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। उम्मीद है कि राज्य निर्वाचन आयोग मई में पंचायत के खाली पड़े पदों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। प्रदेश में करीब 3000 पदों के लिए ये उपचुनाव होना है, जिसमें सबसे बड़ी संख्या पंचायत में वार्ड मेंबर्स की है, वही ग्राम प्रधान के दो और क्षेत्र पंचायत के एक रिक्त पद के लिए भी उपचुनाव होगा।

उत्तराखंड में पंचायत स्तर पर लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में अब तेजी देखने को मिल रही है। पंचायती राज विभाग ने इन रिक्त पदों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है।

राज्य निर्वाचन आयोग अगले महीने यानी मई में उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश भर में हजारों पदों पर जनप्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 3000 पद ऐसे हैं, जो विभिन्न कारणों से रिक्त पड़े हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों की है, जो स्थानीय शासन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

इसके अलावा ग्राम प्रधान के दो पद और क्षेत्र पंचायत सदस्य का एक पद भी रिक्त है, जिन पर उपचुनाव प्रस्तावित है। इन पदों के खाली रहने से कई पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे, जिसे देखते हुए सरकार और विभाग ने अब इस दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में पद रिक्त थे, उनकी सूची तैयार कर राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है। पंचायत चुनाव कराने का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग के पास होता है और वही इस पूरी प्रक्रिया को संचालित करता है। विभाग की ओर से केवल रिक्त पदों की सूचना और आवश्यक विवरण उपलब्ध कराया जाता है।

विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने यह भी कहा कि फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से उपचुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद है कि मई महीने तक इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

दरअसल, पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम होती है। ग्राम पंचायतों में वार्ड सदस्य और प्रधान गांव के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन पदों का लंबे समय तक खाली रहना विकास कार्यों की गति को प्रभावित करता है। कई जगहों पर योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में बाधाएं भी सामने आई हैं। यही वजह है कि सरकार और पंचायती राज विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उपचुनाव की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना चाहते हैं।उपचुनाव के माध्यम से न केवल रिक्त पदों को भरा जाएगा, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र को भी मजबूती मिलेगी। इससे गांवों में जनभागीदारी बढ़ेगी और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी करने से पहले सभी जरूरी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। इसमें मतदाता सूची का सत्यापन, मतदान केंद्रों की तैयारी और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं शामिल है।

सीएम धामी ने पीडब्ल्यूडी की मास्टर प्लान पुस्तिका का किया विमोचन

भारत सरकार साल 2027 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार भी विकसित भारत के संकल्प में अपना योगदान दिए जाने को लेकर काम कर रही है। लोक निर्माण विभाग ने आगामी 5 सालों यानी साल 2026 से साल 2031 के दौरान किए जाने वाले कामों को लेकर मास्टर प्लान पुस्तिका तैयार की है। जिस पुस्तिका का शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विमोचन किया।
प्लान पुस्तिका का विमोचन करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की ओर से आगामी 5 सालों के विजन पर आधारित मास्टर प्लान पुस्तिका का विमोचन किया जाना सराहनीय कदम है। ये पुस्तिका राज्य में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने, सशक्त और सुरक्षित, भविष्य को सुनिश्चित करने का मार्ग है। उन्होंने कहा राज्य में विकास की संभावनाओं और विकसित भारत 2047 के संकल्पों को पूरा करने में ये मास्टर प्लान पुस्तिका एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सीएम ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्य तेजी से गए बढ़े हैं। बीते सालों में राज्य में व्यापक स्तर पर सड़कों का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा राज्य सरकार बुनियादी ढांचे के विकास में नवाचार को प्राथमिकता दे रही है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा हमारा संकल्प है कि राज्य को तय लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाया जाए।
सीएम ने कहा उत्तराखंड राज्य, पर्यटन हब के रूप में उभर रहा है, ऐसे में पर्यटकों की आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार, विकास कामों को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दी जा रही है। उन्होंने कहा यह पुस्तिका निश्चित ही राज्य को आगे बढ़ाने का विजन तय करेगी।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा लोक निर्माण विभाग ने विजन के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर लगातार काम कर रहे हैं। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा विकास के लिए कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है, जिसपर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि मास्टर प्लान पुस्तिका में 100 से अधिक प्रोजेक्ट के विजन को रखा गया है। उन्होंने कहा समय की जरूरतों के आधार पर पुस्तिका में संशोधन भी किए जाएंगे। प्लान पुस्तिका में रोड कनेक्टिविटी इकनॉमी हब कनेक्टिविटी , ब्रिज डेवलपमेंट एवं सेफ्टी, सड़क सुरक्षा एवं स्लोप प्रोटेक्शन, टेक्नोलॉजी, वित्तीय प्रबंधन एवं पॉलिसी जैसे तमाम प्राथमिकताओं पर विभाग का विजन रखा गया है।

 

 

देहरादून में पीएम मोदी के कार्यक्रम पर गणेश गोदियाल ने निशाना साधा

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे पर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीते रोज कांग्रेस द्वारा 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा गया था, जो सीधे-सीधे उत्तराखंड की जनता और प्रदेश की व्यवस्था से जुड़े सवाल थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने इन सवालों को ‘चिमटे से भी नहीं छुआ।
उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के गौरवशाली सैन्य परंपरा का जिक्र तो किया, लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना ने सेना में भर्ती होने का सपना संजोय युवाओं के आकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया. प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि, उत्तराखंड आज महिला अपराध के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में सत्तारूढ़ दल के लोगों की संलिप्तता के आरोप सामने आ रहे हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि, इस मामले में भाजपा के कई बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जांच किस स्थिति में है। इसके अलावा प्रदेश में सामने आए भर्ती घोटालों पर भी प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की, जो युवाओं के भविष्य से सीधा जुड़ा विषय है।
दिल्ली-देहरादून हाईवे के लोकार्पण पर प्रतिक्रिया देते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि, यह परियोजना यदि ‘भाग्य रेखा’ है, तो सरकार यह स्पष्ट करे कि इससे उत्तराखंड को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा? क्या उत्तराखंड को स्थाई राजधानी मिल जाएगी? भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति होगी? एक सख्त भू कानून मिलेगा?
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि, दिल्ली से देहरादून की यात्रा 2.5 घंटे में पूरी होने की सुविधा ने स्थानीय निवासियों में असमंजस की स्थिति है। बढ़ते यातायात और संभावित दबाव को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से आग्रह किया कि वे निवासियों और पर्यटकों दोनों के लिए स्पष्ट ट्रैफिक एडवाइजरी और ठोस मोबिलिटी प्लान जारी करें, ताकि इन चिंताओं को समय रहते दूर किया जा सके। उन्होंने इसे एक सक्रिय और जनहित में उठाया जाने वाला आवश्यक कदम बताया।
प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि, देहरादून शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह हाईवे आने वाले समय में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकता है। देहरादून की आंतरिक सड़कें न तो पर्याप्त चौड़ी हैं, न ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम इतना सशक्त है और न ही शहर की भार अधिग्रहण क्षमता इतनी अधिक है कि वह अचानक बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभाल सके।
दिल्ली और हरियाणा से आने वाले पर्यटकों को मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जाने के लिए देहरादून से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर एक ‘बॉटलनेक’ या ‘चोक प्वाइंट’ बन सकता है। ऐसे में राज्य सरकार की क्या तैयारी है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के रोड शो के लिए हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं को जबरन मानव श्रृंखला बनाने के लिए तपती धूप में घंटों खड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि विभिन्न कॉलेजों, मेडिकल, इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों, महिला मंगल दलों और फैक्ट्रियों में कार्यरत श्रमिकों तक को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने संस्थानों से लोगों को रोड शो में भेजें।
उन्होंने कहा कि, 12 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में शामिल अधिकांश लोग स्वतःस्फूर्त नहीं थे। बल्कि उन्हें दबाव बनाकर लाया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा है और भाजपा के मंत्री, विधायक, पार्षद, जिला और ब्लॉक अध्यक्ष समेत संगठनात्मक पदाधिकारी भी स्वाभाविक रूप से भीड़ जुटाने में असफल साबित हो रहे हैं।
इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि, भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम का प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के मंच पर नजर न आना भी कई सवाल खड़े करता है।

 

पर्यावरण संरक्षण से लेकर ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने करने की पहल,1500 करोड़ की परियोजना का तैयार हो रहा खाका

देहरादून: उत्तराखंड में वन संरक्षण, आजीविका संवर्धन और जैव विविधता के संतुलन को मजबूत करने की दिशा में जायका द्वारा वित्त पोषित उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है। इस कड़ी में पहले फेज के पूरा होने के बाद इसमें दूसरे फेज की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी मुलाकात की है, जिसमें परियोजना की प्रगति और प्रस्तावित फेज-2 को लेकर विस्तृत चर्चा भी हो चुकी है।
मौजूदा समय में यह परियोजना राज्य के 13 वन प्रभागों के अंतर्गत 36 रेंजों के 839 वन पंचायतों में संचालित हो रही है। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न कार्य मदों में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। ईको-रेस्टोरेशन के क्षेत्र में परियोजना में बेहतर काम होने का दावा किया गया है। पहले फेज में निर्धारित 38,000 हेक्टेयर के मुकाबले 38,393 हेक्टेयर क्षेत्र में पुनर्स्थापना कार्य पूरा किया जा चुका है। यह न केवल वन क्षेत्रों के पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि जल संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती देता है। वित्तीय प्रगति की बात करें तो 807 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है, जबकि 93 प्रतिशत से अधिक प्रतिपूर्ति दावे भी प्राप्त हो चुके हैं।

जायका परियोजना का दूसरा चरण उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में सतत विकास को नई ऊंचाई देगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय समुदायों की आजीविका भी सुदृढ़ होगी।
-सुबोध उनियाल वन मंत्री-

यह बताता है कि परियोजना न केवल समयबद्ध है, बल्कि वित्तीय अनुशासन के साथ भी आगे बढ़ रही है। परियोजना के सामाजिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 839 वन पंचायतों में 1503 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है, जबकि 20 क्लस्टर फेडरेशन भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक शीर्षस्थ फेडरेशन की स्थापना भी की गई है, जो इन समूहों के समन्वय और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।आजिविका संवर्धन के तहत 18 मूल्य वृद्धि श्रृंखलाओं पर कार्य किया गया है, जिसमें सेब उत्पादन, मधुमक्खी पालन और अखरोट रोपण जैसे कार्य शामिल हैं। इन गतिविधियों ने स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भू-कटाव की समस्या से निपटने के लिए भी परियोजना के तहत विशेष पहल की गई है। तीन मॉडल साइट्स और चार कैंडिडेट साइट्स पर जापानी तकनीक के अनुरूप कार्य किए जा रहे हैं, जिन्हें इस माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा संरक्षण और भूस्खलन की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। इस बीच परियोजना के दूसरे चरण यानी फेज-2 की प्रारंभिक रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। वर्ष 2026 से 2035 तक प्रस्तावित इस 10 वर्षीय परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 85 प्रतिशत हिस्सा जायका और 15 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। फेज-2 के तहत राज्य के 47 वन रेंजों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
इसमें ईको-रेस्टोरेशन, जड़ी-बूटी रोपण, आजीविका विकास, प्रशिक्षण और विशेष रूप से कृषि वानिकी पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और जैव विविधता संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। यह परियोजना उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की अवधारणा को जमीन पर उतारने का सफल प्रयास है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के लिए एक मजबूत और टिकाऊ वन प्रबंधन मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है।

 

सीनियर आईएफएस अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव,अफसरों के हुए तबादले

uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित सीनियर आईएफएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी हो गई है। इसमें 13 सीनियर भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है।

प्रदेश में सीनियर वन सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। काफी समय से इन अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव को लेकर सूची का इंतजार था।

तबादला सूची में प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल से मुख्य वन संरक्षक पर्यावरण की जिम्मेदारी हटाते हुए उन्हें सीईओ कैंपा और नियोजन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह प्रमुख वन संरक्षक एसपी सुबुद्धि से नोडल की जिम्मेदारी हटा दी गई है, उनके पास वन पंचायत और अध्यक्ष जैव विविधता बोर्ड के साथ ही निदेशक राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

वहीं अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे से वन अनुसंधान प्रबंधन एवं प्रशिक्षण की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। उन्हें परियोजना एवं सामुदायिक वानिकी के अलावा सीसीएफ एडमिन की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है। तबादला सूची में अपर प्रमुख वन संरक्षक नरेश कुमार का नाम भी शामिल हैं जिन्हें मुख्य वन संरक्षक प्रशासन की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

 भारत सरकार से प्रति नियुक्ति के बाद उत्तराखंड लौटे सुरेंद्र मेहरा को अब वन अनुसंधान प्रबंधन एवं प्रशिक्षण के अलावा सतर्कता और विधि प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई है। मीनाक्षी जोशी को नोडल की बड़ी जिम्मेदारी सौंप गई है उनसे मानव संसाधन की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके अलावा उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी बांस एवं रेशा विकास परिषद की भी जिम्मेदारी मिली है।

सुशांत पटनायक से परियोजना एवं सामुदायिक वानिकी की जिम्मेदारी वापस ली गई है। हालांकि वनाग्नि और मुख्य वन संरक्षक पर्यावरण की उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य वन संरक्षक पी के पात्रों को मानव संसाधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जबकि उनसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी बांस एवं रेशा विकास परिषद की जिम्मेदारी हटाई गई है।

पंकज कुमार को निदेशक नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व से हटाते हुए उन्हें वन संरक्षक दक्षिण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही वह क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम रामनगर की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे। विनय कुमार भार्गव को वन संरक्षक अनुसंधान की जिम्मेदारी मिली है। इसी तरह आकाश वर्मा को वन संरक्षक नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

नीतीश मणि त्रिपाठी से वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं की जिम्मेदारी हटाते हुए वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त की जिम्मेदारी मिली है। हाल ही में भारत सरकार से प्रतिनियुक्ति से वापस आने वाली नीतू लक्ष्मी को अब वन संरक्षक यमुना के अलावा एडिशनल सीईओ CAMPA की भी जिम्मेदारी मिली है।