हरक सिंह रावत के बयान से उत्तराखंड की सियासत में हलचल, बोले- जनता के हित में काम करने वालों के साथ खड़ा रहूंगा

भाजपा, कांग्रेस या यूकेडी… जो उत्तराखंड के लोगों के साथ न्याय करेगा,

उसी का समर्थन करूंगा; 2027 चुनाव से पहले बयान के निकाले जा रहे सियासी मायने

देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दल जहां चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं, वहीं नेताओं के बयानों ने भी सियासी चर्चाओं को हवा देना शुरू कर दिया है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह उस राजनीतिक दल के साथ खड़े होंगे, जो उत्तराखंड की जनता के हित में काम करेगा। उनके इस बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हरक सिंह रावत ने अपने बयान में कहा कि वह आज भी अपनी बात पर कायम हैं। जो भी राजनीतिक दल उत्तराखंड के लोगों के साथ न्याय करेगा, चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस हो या उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), वह उसके साथ खड़े रहेंगे। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक सोच और प्राथमिकताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी दल को छोड़ने या किसी दूसरे दल में शामिल होने की कोई घोषणा नहीं की है।

2016 के राजनीतिक घटनाक्रम का भी किया जिक्र

अपने राजनीतिक सफर और वर्ष 2016 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्हें उस दौर को लेकर कोई गम नहीं है। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं का साथ दिया था और तब भी उन्हें कोई शिकायत नहीं थी। हालांकि, बाद में बने राजनीतिक माहौल में वह अपने ईमान और सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते थे।

हरक सिंह रावत का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वह पहले कांग्रेस में रहे, फिर भाजपा में शामिल हुए और बाद में दोबारा कांग्रेस में लौट आए। यही वजह है कि उनके ताजा बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके पुराने राजनीतिक सफर को देखते हुए इस बयान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज और सड़क परियोजनाओं को लेकर रखी अपनी बात

हरक सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि मेडिकल कॉलेज बन गया होता, तो उन्हें खुशी होती, क्योंकि वह इसकी मांग अपने लिए नहीं, बल्कि जनता के हित में कर रहे थे।

इसी तरह उन्होंने लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस मार्ग को मंजूरी मिल गई होती, तो वह भाजपा में ही रहते। उनके मुताबिक, विकास से जुड़े मुद्दे और जनता की जरूरतें उनके राजनीतिक निर्णयों में अहम भूमिका निभाती हैं।

2027 चुनाव से पहले बयान के सियासी मायने

हरक सिंह रावत के इस बयान ने उत्तराखंड में राजनीतिक दलों के बीच संभावित समीकरणों को लेकर बहस तेज कर दी है। उनके बयान का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और यूकेडी में से किसी एक दल का नाम लेकर समर्थन की घोषणा नहीं की, बल्कि उत्तराखंड की जनता के हितों को अपनी प्राथमिकता बताया।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनके बयान को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, फिलहाल उनके किसी नए राजनीतिक कदम या दल परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में हरक सिंह रावत अपने इस बयान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और 2027 के चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं।