देहरादून। जिले में मानकों के विपरीत संचालित हो रहे होमस्टे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। जिलाधिकारी Savin Bansal के निर्देश पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन सफाई” के तहत यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने प्रथम चरण में 17 और द्वितीय चरण में 79 होमस्टे के पंजीकरण रद्द किए हैं। साथ ही इन्हें पर्यटन विभाग की वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जिला प्रशासन की पांच मजिस्ट्रेट टीमों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 136 निरीक्षण किए। जांच में कई होमस्टे होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की तरह संचालित होते पाए गए। प्रशासन के अनुसार कई होमस्टे में रातभर अवैध बार संचालन, तेज आवाज में डीजे और गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायतें मिलीं। इन स्थानों पर उपद्रवी प्रवृत्ति के लोगों के ठहरने और शहर में नशे की हालत में हुड़दंग, ओवरस्पीडिंग तथा हथियारों से फायरिंग जैसी घटनाओं का भी खुलासा हुआ। निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे में रसोई व्यवस्था नहीं मिली, जबकि कई स्थानों पर अग्निशमन उपकरण अनुपलब्ध या उनकी वैधता समाप्त पाई गई।
प्रशासन ने पाया कि कई इकाइयां लीज और किराये पर संचालित की जा रही थीं, जबकि होमस्टे योजना के तहत मालिक का उसी परिसर में निवास अनिवार्य है। कई स्थानों पर निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन भी किया जा रहा था।
कुछ होमस्टे बारातघर और पार्टी स्थल के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। वहीं विदेशी नागरिकों के ठहराव संबंधी अनिवार्य सी-फॉर्म उपलब्ध नहीं कराने के मामले भी सामने आए।
जिलाधिकारी ने कहा कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और स्थानीय निवासियों की आय को बढ़ावा देना है, लेकिन कई स्थानों पर इसका दुरुपयोग होटल और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा को देखते हुए सत्यापन और निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मानकों के खिलाफ चल रहे 96 होमस्टे पर डीएम का बड़ा एक्शन
साइबर अपराध और नशे के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस का जागरूकता अभियान
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के निर्देशन में देहरादून स्थित सेंट जोज़फ़ एकेडमी में साइबर सुरक्षा, भ्रष्टाचार जागरूकता और नशा उन्मूलन विषयों पर एक वृहद जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देहरादून के विभिन्न सरकारी और निजी विद्यालयों के कक्षा 9 से 11 तक के 1200 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था तथा निदेशक सतर्कता डॉ. वी. मुरूगेशन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने युवाओं से तकनीक का जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ उपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अपर पुलिस अधीक्षक अंकुश मिश्रा ने छात्रों को बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया धोखाधड़ी, केवाईसी स्कैम, सिम स्वैप फ्रॉड और साइबर स्टॉकिंग जैसे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने साइबर हाईजीन और डेटा गोपनीयता के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों को महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी—
1930 : राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन
1064 : भ्रष्टाचार निरोधक हेल्पलाइन
नशे के दुष्प्रभावों पर किया जागरूक
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की उपनिरीक्षक प्रेरणा चौधरी ने नशा उन्मूलन सत्र का संचालन किया। उन्होंने छात्रों को मादक पदार्थों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करते हुए आत्म-अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया और नशा उन्मूलन से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने उत्तराखंड पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता बताया। कई शिक्षण संस्थानों ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया।
उत्तराखंड पुलिस ने कहा कि युवाओं को सामाजिक चुनौतियों और साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए ऐसे अभियान राज्यभर में लगातार चलाए जाते रहेंगे।
दून पुलिस की बड़ी कार्रवाई, स्कॉर्पियो से ₹1.55 करोड़ कैश बरामद
देहरादून। दून पुलिस को वाहन चेकिंग अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। कैंट थाना पुलिस ने राजेंद्र नगर कौलागढ़ क्षेत्र में चेकिंग के दौरान महाराष्ट्र नंबर की एक संदिग्ध स्कॉर्पियो से लगभग ₹1.55 करोड़ की नगद धनराशि बरामद की है। पुलिस के अनुसार बरामद नकदी वाहन में बनाए गए एक सीक्रेट केबिन में छुपाकर रखी गई थी। मामले में आयकर विभाग की टीम गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक 15 मई 2026 को सिरमौर मार्ग पर वाहन चेकिंग के दौरान MH12XT 3245 नंबर की महिंद्रा स्कॉर्पियो को रोका गया। वाहन चालक ने अपना नाम सतीश भाई निवासी मेहसाणा, गुजरात बताया। उसके साथ वाहन में जसवंत सिंह और सचिन पटेल नामक दो अन्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
वाहन के दस्तावेज मांगने पर चालक संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिस पर पुलिस को संदेह हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर चालक ने वाहन में भारी मात्रा में नकदी होने की जानकारी दी। पुलिस ने उच्चाधिकारियों और आयकर विभाग को सूचना दी। आयकर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो की बीच और पिछली सीट के बीच बने सीक्रेट केबिन से लगभग ₹1 करोड़ 55 लाख नकद बरामद हुए। पूछताछ में वाहन चालक बरामद धनराशि से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। चालक ने बताया कि वह यह रकम बनारस से लेकर आया था और उसे वाहन में मौजूद जसवंत को देना था।
फिलहाल आयकर विभाग तीनों व्यक्तियों से पूछताछ कर बयान दर्ज कर रहा है। बरामद धनराशि का आकलन भी किया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई आयकर विभाग द्वारा की जाएगी। पुलिस ने संबंधित स्कॉर्पियो वाहन को सीज कर दिया है। कार्रवाई में क्षेत्राधिकारी नगर स्वप्निल मुयाल, कैंट प्रभारी निरीक्षक शंकर सिंह बिष्ट, चौकी प्रभारी विनयता चौहान सहित पुलिस टीम शामिल रही।
वहीं आयकर विभाग की ओर से सहायक आयकर निदेशक पंकज खत्री, आयकर निरीक्षक शशांक पाल और कमलेश पंत ने मौके पर जांच की।
धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: पर्यावरण संरक्षण, ईवी नीति और आत्मनिर्भर उत्तराखंड पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा भी शामिल हुए। सरकार ने प्रदेश के समग्र विकास, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई जनहितकारी निर्णय लिए।
कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड सरकार राज्य को विकास, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में लिए गए फैसले प्रदेश के लिए नई विकास यात्रा की शुरुआत साबित होंगे।
कैबिनेट बैठक में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ नीति को स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे सरकारी स्तर पर ईंधन की बचत और प्रदूषण नियंत्रण को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने प्रदेश में जल्द नई ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) पॉलिसी लागू करने का फैसला भी लिया है। माना जा रहा है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में हरित परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी।
बैठक में ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को भी मंजूरी दी गई। इस अभियान के जरिए उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की योजना है। सरकार धार्मिक, साहसिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य करेगी।
इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों और स्वरोजगार को नई ताकत देना है। कैबिनेट बैठक में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सरकार रासायनिक मुक्त खेती को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाएगी।
साथ ही पीएनजी और पीएम सूर्य घर योजना के विस्तार पर भी सहमति बनी। राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, ताकि उत्तराखंड ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिए गए ये फैसले उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध, पर्यावरण संतुलित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर प्रदेश को नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, कानून व्यवस्था और भर्ती मामलों पर उठाए सवाल
देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षगणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने गुरमीत सिंह से राजभवन में मुलाकात कर राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, पुलिस कार्यप्रणाली और नर्सिंग अभ्यर्थियों के मुद्दे सहित कई मामलों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांग की कि सरकार को इन मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और आम जनता का भरोसा प्रशासन तथा पुलिस व्यवस्था से उठता जा रहा है। बीते दिनों राज्य में हुई कई घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देहरादून के राजपुर रोड स्थित बार में हुई घटना ने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में पुलिस विभाग के भीतर समन्वय की कमी उजागर हुई है और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बार प्रकरण में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की चर्चाएं आम हो चुकी हैं, जिससे जनता के बीच पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। प्रतिनिधिमंडल ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने और दोषी अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में भाजपा विधायक अरविन्द पाण्ड्य द्वारा मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया गया। कांग्रेस ने कहा कि जब सत्तारूढ़ दल के विधायक ही स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने 30 अप्रैल 2026 को हुए पुलिस मुठभेड़ प्रकरण का भी मुद्दा उठाया। कांग्रेस का कहना है कि कथित अपराधी की मौत के बाद सामने आए कई तथ्य इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान निर्धारित मानकों का पालन किया था और क्या स्वतंत्र एवं निष्पक्ष साक्ष्यों को पर्याप्त रूप से सामने लाया गया।
कांग्रेस ने इस मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने तथा जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने 6 मई 2026 को चंपावत में सामने आए नाबालिग युवती प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा पौड़ी जिले के सतपुली क्षेत्र में एक युवक द्वारा कथित पुलिस प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या किए जाने के मामले को भी गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग उठाई गई।
कांग्रेस नेताओं ने नर्सिंग अभ्यर्थियों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के अनुरूप अभ्यर्थियों के हित में शीघ्र निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए।
राजभवन पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत , विधायक लखपत बुटोला सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि इन मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने अधिकारियों को लगाई फटकार,तीन महीने से वेतन लंबित होने पर शिक्षा मंत्री नाराज
प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करते हुए लंबित वेतन शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी भुगतान समय पर सुनिश्चित किए जाएं।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को अनावश्यक आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और सरकार उनके सम्मान एवं सुविधाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान में जो भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधाएं आ रही हैं, उन्हें जल्द दूर कर नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने संबंधित विद्यालयों और विभागीय स्तर पर लंबित औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि जल्द से जल्द वेतन निर्गत किया जा सके और शिक्षकों को राहत मिल सके।
अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मामले में संज्ञान लेने और शीघ्र वेतन जारी करने के निर्देश देने पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का आभार व्यक्त किया। संघ पदाधिकारियों ने मांग की कि राजकीय शिक्षकों की तर्ज पर अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी नियमित और समय पर जारी किया जाए।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड स्थित ओसला गांव में विद्यालय भवन नहीं होने संबंधी समाचारों का गंभीरता से संज्ञान लिया है। खबरों में दावा किया गया था कि गांव में पिछले 15 वर्षों से विद्यालय भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), उत्तरकाशी द्वारा जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय ओसला में वर्तमान में 24 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और विद्यालय भवन अच्छी स्थिति में संचालित हो रहा है।
वहीं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ओसला में केवल एक छात्र अध्ययनरत है। छात्रहित को ध्यान में रखते हुए दोनों विद्यालयों का संचालन प्राथमिक विद्यालय भवन में ही किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ओसला के भवन मरम्मत और रंग-रोगन के लिए जिला योजना के तहत 3.50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। हालांकि कार्यदायी संस्था ने इस राशि को अपर्याप्त बताया था। इसके बाद वर्ष 2022-23 में अतिरिक्त 1.50 लाख रुपये की स्वीकृति देकर यह धनराशि ग्रामीण निर्माण विभाग, उत्तरकाशी को हस्तांतरित की गई। विभाग को निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मसूरी विधानसभा की सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए अधिकारियों संग हुई बैठक, मोतीलाल नेहरू मार्ग की बदहाल स्थिति पर जताई नाराजगी
देहरादून में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैंप कार्यालय में मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत संचालित और प्रस्तावित मोटर मार्ग निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित सड़क निर्माण और सुधारीकरण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके।
बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने क्यारा-धनौल्टी मार्ग, गढ़-बुरांसखण्डा मार्ग, मोटीधार-मसराना, लोहारीगढ़, कोठियाना, छोटी छमरौली से डोमकोट, विलासपुर कांडली और अनारवाला-मालसी मार्ग सहित देहरादून के विभिन्न वार्डों की सड़कों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली।
इसके अलावा गजियावाला, अमन विहार और धोरण पुल की वर्तमान स्थिति और निर्माण कार्यों की प्रगति पर भी अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई। मंत्री ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान मसूरी के मोतीलाल नेहरू मार्ग की खराब स्थिति पर कैबिनेट मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क की बदहाल स्थिति आम लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
मंत्री ने कहा कि वह स्वयं 16 मई को मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि निरीक्षण से पहले मार्ग की मरम्मत का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
ऋषिकेश में किन्नरों की बधाई के नाम पर मनमानी वसूली पर लगेगी रोक, नगर निगम ने तय की 2100 रुपए कीअधिकतम राशि
ऋषिकेश। ऋषिकेश नगर निगम ने किन्नरों द्वारा बधाई के नाम पर की जाने वाली कथित मनमानी वसूली पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। देहरादून नगर निगम के बाद अब ऋषिकेश नगर निगम बोर्ड बैठक में भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर दिया गया है।
नगर निगम की बोर्ड बैठक में वार्ड पार्षद अभिनव सिंह मलिक द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी पार्षदों ने समर्थन देते हुए सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के अनुसार अब शहर में किसी भी शुभ अवसर पर किन्नर समुदाय द्वारा बधाई के बदले अधिकतम 2100 रुपए की राशि ही ली जा सकेगी।
नगर निगम बोर्ड के फैसले के तहत विवाह समारोह, शिशु जन्म, गृह प्रवेश और अन्य शुभ आयोजनों में बधाई के नाम पर मनमानी धनराशि की मांग नहीं की जा सकेगी। यदि किसी परिवार या व्यक्ति पर तय सीमा से अधिक धनराशि देने का दबाव बनाया जाता है, तो वह इसकी शिकायत प्रशासन से कर सकेगा।
नगर निगम का मानना है कि इस निर्णय से आम नागरिकों को राहत मिलेगी और कई बार होने वाले विवादों पर भी रोक लग सकेगी।
बैठक के दौरान पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने कहा कि कई बार लोगों से बधाई के नाम पर अत्यधिक रकम मांगी जाती है। रकम नहीं देने की स्थिति में विवाद और असहज माहौल भी पैदा हो जाता है, जिससे खुशियों के मौके पर परिवारों को परेशानी उठानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि समाज में परंपराओं और किन्नर समुदाय के सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या दबाव उचित नहीं माना जा सकता। इसी उद्देश्य से यह प्रस्ताव लाया गया।
नगर निगम बोर्ड बैठक में मौजूद अन्य पार्षदों ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि इससे आम जनता को राहत मिलेगी और सामाजिक विवाद कम होंगे। उनका कहना था कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, इसलिए इस विषय पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी थी।
प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर निगम प्रशासन जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
नगर निगम के इस फैसले के बाद शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई लोगों ने इसे जनहित में लिया गया फैसला बताया है। स्थानीय निवासी दीपक रावत और संतोष नेगी सहित कई नागरिकों ने नगर निगम बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है।
लोगों का कहना है कि इससे जरूरत से ज्यादा धनराशि मांगने और अनावश्यक विवादों की घटनाओं में कमी आएगी।
नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने बताया कि यह प्रस्ताव पार्षद अभिनव सिंह मलिक द्वारा बोर्ड बैठक में रखा गया था, जिसे सभी सम्मानित पार्षदों की सहमति से पारित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले 29 अप्रैल को देहरादून नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी इसी मुद्दे पर चर्चा हुई थी। वहां पार्षदों द्वारा निर्णय लिया गया था कि किन्नरों को बधाई स्वरूप अधिकतम 5100 रुपए तक की राशि ही दी जाएगी।
अब ऋषिकेश नगर निगम द्वारा भी इसी तरह का निर्णय लिए जाने के बाद यह मुद्दा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
ईंधन बचत का संदेश देने निकले मंत्री, सोशल मीडिया पर घिर गए खुद ही नियम तोड़ने के आरोपों में
देहरादून। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सोमवार को ईंधन संरक्षण और सादगी का संदेश देने के लिए स्कूटी चलाते नजर आए, लेकिन उनकी यह पहल सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गई। जिस स्कूटी पर मंत्री सवार होकर कैंप कार्यालय पहुंचे, उसका इंश्योरेंस वैध नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद लोगों ने उन्हें ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया।
मामला बढ़ने पर मंत्री गणेश जोशी को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि स्कूटी उनके ओएसडी की थी और उसका इंश्योरेंस रिन्यू की प्रक्रिया में था, जिसे अब नवीनीकृत करा दिया गया है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच ऊर्जा संसाधनों और ईंधन संकट को लेकर चिंता जताते हुए मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को एक प्रतीकात्मक पहल की। गढ़ी कैंट क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने सरकारी वाहन छोड़कर स्कूटी से कैंप कार्यालय पहुंचने का फैसला किया।
मंत्री ने इसे ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश बताया। उनका कहना था कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया कई चुनौतियों से गुजर रही है और ऐसे समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग न करे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल का संदेश देते रहे हैं। उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोपहिया वाहन का उपयोग कर जनता को जागरूक करने का प्रयास किया।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए चार पहिया वाहनों के बजाय दोपहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहनों का इस्तेमाल करें तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या में भी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मंत्री ने लोगों से स्थानीय कार्यक्रमों और कम दूरी की यात्राओं में वैकल्पिक साधनों के इस्तेमाल की अपील भी की।
हालांकि, मंत्री की यह पहल उस समय विवादों में आ गई जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि जिस स्कूटी पर मंत्री सवार थे, उसका इंश्योरेंस वैध नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि जो मंत्री जनता को नियमों का पालन करने का संदेश दे रहे हैं, वही खुद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते नजर आए।
इसके अलावा मंत्री के आगे-पीछे चल रही गाड़ियों के काफिले को लेकर भी लोगों ने सवाल खड़े किए। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि एक ओर मंत्री स्कूटी चलाकर ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके साथ चल रहे कई वाहन और वीडियो शूट करने वाली गाड़ियां ईंधन खर्च कर रही थीं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उन्होंने केवल प्रतीकात्मक संदेश देने के उद्देश्य से स्कूटी का इस्तेमाल किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूटी उनके ओएसडी की थी और उसका इंश्योरेंस रिन्यू की प्रक्रिया में था।
मंत्री ने कहा,
“आज मैंने अपने ओएसडी की स्कूटी उसी समय चलाने के लिए ली थी। जहां तक इंश्योरेंस की बात है तो उसका रिन्यूअल प्रक्रिया में था और अब इंश्योरेंस रिन्यू हो चुका है। मैंने केवल एक सिंबॉलिक संदेश देने का प्रयास किया है।”
उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही उनकी खुद की स्कूटी भी आ जाएगी और वे आसपास के स्थानीय कार्यक्रमों में दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दूरस्थ यात्राओं के लिए कार का उपयोग करना जरूरी होगा।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकारी वाहनों का उपयोग कम करना और लोगों को ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या भी कम करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा,“ऐसा नहीं है कि हर जगह स्कूटी से जाऊंगा, लेकिन स्थानीय दौरों में दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करूंगा। कोशिश रहेगी कि गाड़ियों का कम से कम उपयोग हो और फ्लीट में भी वाहनों की संख्या घटाई जाए।”
मंत्री की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सकारात्मक संदेश देने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे केवल प्रतीकात्मक राजनीति और प्रचार का हिस्सा करार दे रहे हैं।
फिलहाल, बिना वैध इंश्योरेंस वाहन चलाने और सरकारी काफिले के साथ ईंधन बचत का संदेश देने को लेकर उठे सवालों ने मंत्री की इस पहल को चर्चा और विवाद दोनों के केंद्र में ला दिया है।
खटीमा-नानकमत्ता में धर्मांतरण मामलों पर पुलिस सख्त, तीन मुकदमे दर्ज, एसआईटी करेगी जांच
एसएसपी अजय गणपति के निर्देश पर कार्रवाई तेज,
लालच और दबाव देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई
खटीमा। उधम सिंह नगर जिले में कथित धर्मांतरण के तीन अलग-अलग मामले सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में उधम सिंह नगर पुलिस ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए तीनों प्रकरणों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भय, दबाव, धोखाधड़ी, झूठे प्रलोभन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले मामले में एक वादी ने कोतवाली खटीमा में तहरीर देकर आरोप लगाया कि तीन लोगों द्वारा प्रार्थना सभाओं का आयोजन कर हिंदू धर्म के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा था। शिकायत में कहा गया कि लोगों को बीमारी ठीक करने का झांसा दिया गया और आर्थिक सहायता का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया गया।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरे प्रकरण में थाना नानकमत्ता क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि गांव में चर्चनुमा ढांचा बनाकर धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बदले पांच लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया गया और परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया।
इस मामले में पुलिस ने उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गतिविधियों में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
तीसरे मामले में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति द्वारा थारू समाज के लोगों को गुमराह करते हुए हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाने का प्रयास किया जा रहा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, सामाजिक भेदभाव समाप्त करने के नाम पर लोगों को झूठे प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था।
इस मामले में भी कोतवाली खटीमा में अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी अजय गणपति ने तीनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी का पर्यवेक्षण पुलिस उपाधीक्षक विभव सैनी द्वारा किया जाएगा। टीम में संबंधित मामलों के विवेचक, थाना प्रभारी और एसओजी की सर्विलांस टीम को शामिल किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करेगी और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
उधम सिंह नगर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा भय, दबाव, धोखाधड़ी या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जाता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना और सामाजिक सौहार्द कायम रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्रशासन को देने की अपील भी की गई है।










