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HomeDehradunप्रवासी उत्तराखण्डियों को जोड़ने की मुहिम ने पकड़ी रफ्तार

प्रवासी उत्तराखण्डियों को जोड़ने की मुहिम ने पकड़ी रफ्तार

 पहले सम्मेलन से तीसरे आयोजन तक बदली विकास की रूपरेखा

पहले सम्मेलन में 17 देशों के प्रवासियों ने लिया था हिस्सा, दूसरे आयोजन में पर्यावरण,

स्वास्थ्य और शिक्षा पर हुआ मंथन; अब तीसरे सम्मेलन में निवेश, पर्यटन और स्वरोजगार पर रहेगा फोकस

देहरादून। उत्तराखण्ड से बाहर रहकर देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवा रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपनी जन्मभूमि से जोड़ने और प्रदेश के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल अब तीसरे चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार की ओर से आयोजित किए जा रहे प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाएं, बल्कि इनके माध्यम से प्रदेश को निवेश, रोजगार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई संभावनाएं मिलें, इसी उद्देश्य से यह सिलसिला शुरू किया गया था। पहले सम्मेलन में 17 देशों से आए प्रवासियों ने उत्तराखण्ड के विकास को लेकर अपने विचार रखे थे, जबकि दूसरे सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। अब 13 नवंबर को दून विश्वविद्यालय में तीसरे प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

प्रवासी उत्तराखण्डियों की प्रदेश के विकास में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का आयोजन 12 जनवरी 2025 को देहरादून में किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन का शुभारंभ किया था। इस आयोजन में 17 देशों से पहुंचे प्रवासी उत्तराखण्डियों ने भागीदारी की। सम्मेलन में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके प्रवासियों ने प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को लेकर सुझाव दिए थे। चार अलग-अलग सत्रों में निवेश, पर्यटन, आतिथ्य एवं आरोग्य सेवाओं, कौशल विकास, विदेशों में रोजगार, उच्च शिक्षा, बागवानी और जड़ी-बूटी उत्पादन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

पहले सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य प्रवासियों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ उत्तराखण्ड को दिलाना था। मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की थी। इस दौरान यह जानकारी भी सामने आई थी कि 30 प्रवासी उत्तराखण्डी प्रदेश के अलग-अलग गांवों को गोद लेकर वहां विकास कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। यह पहल इस लिहाज से महत्वपूर्ण थी कि प्रदेश से बाहर रहने के बावजूद कई प्रवासी अपने गांवों की समस्याओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं। सम्मेलन के माध्यम से ऐसे लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

इसके बाद राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में पांच नवंबर 2025 को दूसरा प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन आयोजित किया गया। इस आयोजन में भी प्रवासियों को प्रदेश की विकास यात्रा से जोड़ने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे प्रवासियों ने अपने अनुभव साझा किए और उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास की योजनाओं पर सुझाव रखे। फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में पहचान बना चुके प्रवासी उत्तराखण्डियों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की थी।

दूसरे सम्मेलन में प्रदेश के लिए राष्ट्रीय फैशन डिजाइनिंग संस्थान का केंद्र स्थापित करने और हिमालयी रेशों के विकास के लिए टेक्सटाइल पार्क बनाने जैसे सुझाव भी सामने आए थे। इन सुझावों के पीछे स्थानीय संसाधनों को रोजगार और उद्योग से जोड़ने की सोच थी। उत्तराखण्ड में उपलब्ध प्राकृतिक रेशों, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी ध्यान आकर्षित किया गया था। इससे स्पष्ट हुआ कि प्रवासी उत्तराखण्डी केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे तकनीकी ज्ञान, वैश्विक अनुभव और नए विचारों के माध्यम से भी प्रदेश को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।

अब तीसरे प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का आयोजन 13 नवंबर को दून विश्वविद्यालय के डॉ. नित्यानन्द ऑडिटोरियम में किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्मेलन का आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रह रहे प्रवासी उत्तराखण्डी अपनी प्रतिभा, परिश्रम और उपलब्धियों से प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उनके अनुभव, विशेषज्ञता और सुझाव राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

तीसरे सम्मेलन में ‘विकसित उत्तराखण्ड में प्रवासियों की भूमिका’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रवासियों की विशेषज्ञता, निवेश क्षमता और अनुभव को प्रदेश की विकास योजनाओं से जोड़ने पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त ‘हौसलों की उड़ान : उत्तराखण्ड के युवा संघर्ष से सफलता के शिखर तक’ विषय पर भी संवाद होगा। इस सत्र में संघर्ष से सफलता तक पहुंचे युवाओं के अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित करने और प्रदेश के युवाओं के लिए संभावनाओं के नए रास्ते तलाशने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सम्मेलन में आने वाले प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ सार्थक संवाद की व्यवस्था की जाए। उनके सुझावों को गंभीरता से सुना जाए और निवेश, स्वरोजगार, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में उनके योगदान की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल प्रवासियों को एक मंच पर एकत्रित करना नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास के साथ उनका स्थायी और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करना भी है।

सम्मेलन में उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई जाएगी। इसके लिए आयोजन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है। प्रत्येक व्यवस्था के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और तैयारियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सुझावों को जमीन पर उतारना होगी सबसे बड़ी चुनौती

प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन की अब तक की यात्रा पर नजर डालें तो पहले आयोजन में निवेश, पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं पर जोर रहा, जबकि दूसरे सम्मेलन में पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों को प्रमुखता मिली। अब तीसरे सम्मेलन में विकसित उत्तराखण्ड के लक्ष्य के साथ प्रवासियों की भूमिका को केंद्र में रखा जा रहा है। हालांकि इन आयोजनों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सम्मेलनों में सामने आने वाले सुझावों और प्रस्तावों को कितनी गंभीरता से अमल में लाया जाता है।

प्रदेश में पलायन, रोजगार की कमी, गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव और स्थानीय संसाधनों के सीमित उपयोग जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं। ऐसे में विदेशों और देश के बड़े शहरों में कार्यरत प्रवासी विशेषज्ञों का अनुभव उत्तराखण्ड के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। जरूरत इस बात की है कि सम्मेलन में मिले सुझावों को विभागवार कार्ययोजना में बदला जाए, निवेश प्रस्तावों की नियमित निगरानी हो और प्रवासियों के साथ संवाद केवल आयोजन तक सीमित न रहे। यदि सरकार इस दिशा में ठोस व्यवस्था विकसित करती है तो प्रवासी उत्तराखण्डी राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और गांवों के पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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