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हरीश रावत की खुली चुनौती :- जुम्मे की छुट्टी का प्रमाण दें अमित शाह, छोड़ दूंगा राजनीति

गृह मंत्री को खुली चुनौती, कांग्रेस सरकार के किसी एक घोटाले का सबूत देने की भी दी नसीहत;
भाजपा सरकार के मंत्रियों की संपत्ति और सीबीआई जांच पर उठाए सवाल

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमित शाह ने अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान कांग्रेस पर तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय शुक्रवार यानी जुम्मे की नमाज के लिए छुट्टी का प्रस्ताव लाने का दावा किया। शाह के इस बयान पर हरीश रावत ने तीखा पलटवार करते हुए सीधे गृह मंत्री को चुनौती दे दी। रावत ने दो टूक कहा कि जुम्मे की छुट्टी के प्रस्ताव का दस्तावेज दिखा दीजिए या कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का कोई एक घोटाला प्रमाण सहित साबित कर दीजिए, वह राजनीति छोड़ देंगे और जनता से माफी भी मांगेंगे।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जारी अपनी प्रतिक्रिया में अमित शाह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने अपने संबोधन में उन्हें निशाने पर लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिनका कोई आधार नहीं है। रावत ने यहां तक तंज कसा कि अमित शाह के भाषण के दौरान मौजूद लोगों ने भी उनके आरोपों का खुलकर समर्थन नहीं किया। उनके मुताबिक, आरोपों पर तालियां नहीं बजना इस बात का संकेत था कि वहां मौजूद लोग भी इन दावों से सहमत नहीं थे।

भाजपा सरकार को भी घेरा, मंत्रियों की संपत्ति पर उठाए सवाल

अमित शाह के सचिवालय को कमीशनखोरी का अड्डा बताए जाने पर हरीश रावत ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज सचिवालय में सेवा भाव से काम होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार को अपने मंत्रियों और उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति पर उठ रहे सवालों का जवाब भी देना चाहिए। रावत ने एक मंत्री के पति की कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का जिक्र करते हुए कहा कि खुद उनके पति ने संपत्ति को लेकर बयान दिया है। उन्होंने आय से अधिक संपत्ति के मामले का हवाला देते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट की ओर से सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद सरकार जांच की अनुमति नहीं दे रही है।

घोटालों पर घेरने की चुनौती, भाजपा पर भी लगाए गंभीर आरोप

हरीश रावत ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस के कार्यकाल के घोटालों की बात करती है, लेकिन अपनी सरकार से जुड़े सवालों पर चुप्पी साध लेती है। रावत ने अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा कि वह कांग्रेस सरकार के समय का कोई एक घोटाला साबित कर दें। जुम्मे की छुट्टी के प्रस्ताव का प्रमाण भी दे दें तो वह राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हैं।

स्टिंग की राजनीति पर भी भाजपा को घेरा

शराब प्रकरण और स्टिंग ऑपरेशन को लेकर भी रावत ने भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन के पीछे भाजपा नेताओं की भूमिका रही है। रावत ने कैलाश विजयवर्गीय का नाम लेते हुए दावा किया कि इन स्टिंग अभियानों को राजनीतिक उद्देश्य से अंजाम दिया गया। उन्होंने भाजपा पर खुद स्टिंग की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को सब कुछ मालूम है।

अमित शाह के हमले के बाद हरीश रावत का यह पलटवार महज राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि सीधे सबूतों की लड़ाई में बदलता दिखाई दे रहा है। एक तरफ भाजपा कांग्रेस के पुराने कार्यकाल को भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के मुद्दे पर घेर रही है, तो दूसरी तरफ रावत ने आरोपों को प्रमाणित करने की चुनौती देकर भाजपा को जवाब देने के लिए मजबूर करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि भाजपा इस चुनौती का जवाब दस्तावेजों और तथ्यों के साथ देती है या सियासी पलटवार से ही मुकाबला करती है।

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