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HomeDehradunलापरवाही भवन मालिक की या विभाग की ?

लापरवाही भवन मालिक की या विभाग की ?

फायर सेफ्टी में लापरवाही पड़ेगी भारी,

जुर्माने के साथ होगी आपराधिक कार्रवाई

उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक-2026 विधानसभा में पारित,

नियम तोड़ने पर भवन सील करने और खाली कराने तक का अधिकार

देहरादून। उत्तराखंड में अब आग से सुरक्षा के इंतजामों में लापरवाही बरतना भवन मालिकों और प्रतिष्ठान संचालकों को भारी पड़ सकता है। धामी सरकार ने अग्निकांडों की रोकथाम और लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए फायर सेफ्टी के नियमों को सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा सत्र में उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक-2026 पारित हो गया है। इसके तहत फायर एनओसी और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य करने के साथ उल्लंघन पर जुर्माना, भवन सील करने और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

नए कानून का दायरा केवल व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा। आवासीय भवनों, होटल, होम स्टे, रिसॉर्ट, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, मॉल, गोदाम और ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण एवं बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठान भी इसके दायरे में आएंगे। स्थायी और अस्थायी निर्माण, बेसमेंट तथा भूमिगत पार्किंग में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

इन भवनों के लिए फायर एनओसी जरूरी

विधेयक में भवनों की ऊंचाई और क्षेत्रफल के आधार पर फायर एनओसी की अनिवार्यता तय की गई है। आवासीय भवनों में 12 मीटर से अधिक ऊंचाई या 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल होने पर एनओसी जरूरी होगी। होटल, होम स्टे, रिसॉर्ट और शिक्षण संस्थानों के लिए 9 मीटर से अधिक ऊंचाई या 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का मानक रखा गया है। वहीं अस्पताल और नर्सिंग होम में 9 मीटर से अधिक ऊंचाई या 1,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल होने पर फायर एनओसी अनिवार्य होगी।

लापरवाही पर जुर्माना और भवन सील करने का अधिकार

अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं करने पर 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की लागत का डेढ़ गुना तक आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान है। गंभीर उल्लंघन मिलने पर संबंधित भवन को खाली कराने और सील करने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।

यदि अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आग लगती है और किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर चोट होती है तो मामले के तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। यानी अब लापरवाही को केवल विभागीय चूक मानकर छोड़ना आसान नहीं होगा।

अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय

विधेयक में अग्निशमन विभाग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के साथ अधिकारियों को निरीक्षण, सुरक्षा उपकरणों की जांच और आवश्यक निर्देश जारी करने के अधिकार दिए गए हैं। अग्निशमन केंद्रों की स्थापना, कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य आग लगने के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय पहले से सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस कानून की असली परीक्षा इसके प्रभावी क्रियान्वयन में होगी। प्रदेश में कितने भवनों की नियमित जांच होती है, कितने प्रतिष्ठानों के पास वैध एनओसी है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कितनी कार्रवाई होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।


बॉक्स | सिर्फ भवन मालिक ही क्यों, अग्निशमन विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा?

फायर सेफ्टी के नाम पर केवल जुर्माना वसूलना काफी नहीं, विभाग को भी देनी होगी अपने काम की जवाबदेही।

  • निरीक्षण में लापरवाही: क्या होटल, अस्पताल, स्कूल और व्यावसायिक भवनों की नियमित जांच हो रही है?
  • एनओसी का खेल: बिना अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र चल रहे प्रतिष्ठानों पर अब तक कितनी कार्रवाई हुई?
  • कागजों में सुरक्षा: क्या विभाग केवल फाइलों में लगे अग्निशमन उपकरणों और प्रमाणपत्रों से संतुष्ट है या मौके पर भी जांच होती है?
  • कर्मचारियों की कमी: अग्निशमन केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारी, वाहन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं?
  • जवाबदेही तय हो: निरीक्षण में लापरवाही या गलत प्रमाणपत्र जारी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

बड़ा सवाल: आग लगने के बाद भवन मालिक पर कार्रवाई तो होगी, लेकिन यदि समय रहते निरीक्षण नहीं हुआ, सुरक्षा खामियों को नजरअंदाज किया गया या विभागीय लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कौन करेगा? अग्नि सुरक्षा कानून तभी प्रभावी होगा, जब भवन मालिकों के साथ सरकारी तंत्र की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

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