कांग्रेस प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने 2017 के दृष्टि पत्र और 2022 के घोषणा पत्र के वादे अधूरे रहने का लगाया आरोप,
कहा- जनता बदलाव का मन बना चुकी है
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज होने लगी है। प्रदेश में साढ़े नौ साल से अधिक समय से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार की ओर से चंपावत के बाद हरिद्वार में कैबिनेट बैठक आयोजित किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने इन बैठकों को चुनाव से पहले जनता को साधने की कवायद करार देते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार अपने पुराने चुनावी वादे पूरे करने में नाकाम रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए सरकार ने जनता की समस्याओं और प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर समय रहते ठोस फैसले नहीं लिए। अब चुनाव नजदीक आते ही कैबिनेट बैठकों के जरिए सुर्खियां बटोरने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इन बैठकों को महज हेडलाइन मैनेजमेंट बताते हुए कहा कि इससे सरकार को राजनीतिक लाभ मिलने वाला नहीं है।
2017 और 2022 के चुनावी वादों पर उठाए सवाल
शीशपाल सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्ष 2017 के दृष्टि पत्र और 2022 के विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में जनता से कई वादे किए थे, लेकिन वे अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, सरकार को पहले अपने चुनावी वादों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट बैठकें आयोजित करना अपने आप में उपलब्धि नहीं है। असली सवाल यह है कि इन बैठकों में लिए गए फैसलों से आम जनता को कितना लाभ मिल रहा है और प्रदेश की समस्याओं का समाधान किस हद तक हो रहा है।
चुनाव से पहले बैठकों को कांग्रेस ने बताया राजनीतिक कवायद
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अब चुनावी माहौल को देखते हुए फैसलों और बैठकों के माध्यम से जनता के बीच अपनी छवि बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। बिष्ट ने दावा किया कि प्रदेश में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है और जनता बदलाव का मन बना चुकी है।
उन्होंने कहा कि अब कैबिनेट बैठकों के जरिए सरकार को चुनावी लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है। कांग्रेस का दावा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता उसके पक्ष में समर्थन जताएगी।
भाजपा सरकार की कैबिनेट बैठकों को लेकर कांग्रेस के इस हमले ने प्रदेश की राजनीति में चुनावी बहस को और तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस सरकार के वादों और कार्यशैली पर सवाल उठा रही है, वहीं आगामी चुनाव में इन आरोपों का राजनीतिक असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।






